बस्तर महाराज ने पनिका समाज की मांग को गंभीरता से सुना, दशहरा उत्सव के बाद रायपुर में सामाजिक बैठक में शामिल होने का दिया आश्वासन
जगदलपुर। पनिका समाज की अनुसूचित जनजाति (आदिवासी) सूची में पुनर्बहाली की मांग को लेकर बस्तर के वर्तमान महाराज कमलचंद्र भंजदेव ने सकारात्मक रुख व्यक्त किया है। उन्होंने पनिका समाज के प्रतिनिधिमंडल से चर्चा के दौरान कहा कि वे पनिका समाज का बहुत सम्मान करते हैं और बस्तर राजपरिवार का इस समाज से सदियों पुराना संबंध रहा है। उन्होंने समाज की मांग से जुड़े तथ्यों को गंभीरता से सुनते हुए आश्वस्त किया कि दशहरा उत्सव के बाद रायपुर में सामाजिक बैठक आयोजित की जाए। वे स्वयं बैठक में शामिल होंगे और समस्त परिस्थितियों से अवगत होने के बाद संबंधित प्राधिकारियों से चर्चा करेंगे।
यह महत्वपूर्ण चर्चा विगत 10 अक्टूबर को जगदलपुर में हुई। बस्तर के ऐतिहासिक दशहरा उत्सव के अंतर्गत काछनगुड़ी में काछन देवी से उत्सव आयोजन की अनुमति लेने की पारंपरिक रस्म के बाद बस्तर महाराज अपने पैलेस में पनिका समाज के प्रतिनिधिमंडल से मिले। इसी दौरान उन्होंने पनिका समाज की आदिवासी बहाली संबंधी मांग पर अपना पक्ष रखा। उल्लेखनीय है कि
कमलचंद्र भंजदेव भारतीय जनता पार्टी से
जुड़े हुए हैं और राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष रह चुके हैं।
608 वर्षों की परंपरा में पनिका समाज की ऐतिहासिक उपस्थिति
बस्तर दशहरा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि क्षेत्र की विशिष्ट सांस्कृतिक परंपराओं, जनजातीय आस्थाओं और ऐतिहासिक सामाजिक संबंधों का प्रतीक है। लगभग 75 दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में काछन देवी से अनुमति लेने की परंपरा का विशेष महत्व है। मान्यता के अनुसार, क्वारी पनिका बालिका में काछन देवी की सवारी आने की परंपरा भी लंबे समय से चली आ रही है। वर्तमान बस्तर दशहरा इस परंपरा का 608वां वर्ष बताया जाता है।
बस्तर महाराज ने इसी ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में पनिका समाज के साथ राजपरिवार के पुराने संबंधों का उल्लेख किया। उनके वक्तव्य से यह स्पष्ट हुआ कि समाज द्वारा प्रस्तुत ऐतिहासिक तथ्यों और उसकी मांग को वे समझना चाहते हैं तथा इस विषय पर आगे संवाद के लिए तैयार हैं।
रायपुर में बैठक के बाद संबंधित प्राधिकारियों से करेंगे चर्चा
पनिका समाज के नवनियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष ने समाज की अनुसूचित जनजाति सूची में पुनर्बहाली की मांग बस्तर महाराज के समक्ष रखी। इस पर कमलचंद्र भंजदेव ने कहा कि स्थानीय पनिका समाज ने उन्हें इस विषय से जुड़े तथ्य उनके संज्ञान में लाया है। उन्होंने सुझाव दिया कि बस्तर दशहरा उत्सव के बाद रायपुर में समाज की एक बैठक आयोजित की जाए, जिसमें वे भी उपस्थित रहेंगे। बैठक में सभी तथ्यों और परिस्थितियों को समझने के बाद वे संबंधित प्राधिकारियों से बातचीत करेंगे।
महाराज का यह आश्वासन पनिका समाज के लिए संवाद और अपनी ऐतिहासिक मांग को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण अवसर है। हालाकि, अनुसूचित जनजाति सूची में पुनर्बहाली का निर्णय संवैधानिक एवं विधिक प्रक्रिया के अधीन है, इसलिए इस संबंध में आगे की कार्रवाई और संबंधित प्राधिकारियों का निर्णय महत्वपूर्ण होगा।
प्रतिनिधिमंडल में समाज के प्रमुख पदाधिकारी शामिल
इस अवसर पर पनिका समाज के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. देवधर महंत, वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. फूलदास महंत, कोरबा सांसद के प्रतिनिधि पोषक महंत तथा डॉ. बरसाइतदास महंत उपस्थित थे। प्रतिनिधिमंडल ने समाज की मांग और उससे जुड़े तथ्यों को बस्तर महाराज के समक्ष रखा।पनिका समाज की आदिवासी बहाली की मांग के संदर्भ में बस्तर महाराज की इस पहल को सामाजिक संवाद की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब दशहरा उत्सव के बाद प्रस्तावित रायपुर बैठक पर समाज की निगाहें टिकी हैं, जहां ऐतिहासिक तथ्यों, संवैधानिक प्रावधानों और समाज की मांग पर आगे की चर्चा होने की अपेक्षा है।



